तेनालीराम की कहानियां : कुएं का विवाह

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जिस गांव में भेष बदलकर रहता था, वहां भी यह मुनादी सुनाई दी। गांव का मुखिया परेशान था। तेनालीराम समझ गए कि उसे खोजने के लिए ही महाराज ने यह चाल चली है।

तेनालीराम ने मुखिया को बुलाकर कहा, 'मुखियाजी, आप चिंता न करें, आपने मुझे गांव में आश्रय दिया हैं इसलिए आपके उपकार का बदला मैं चुकाऊंगा। मैं एक तरकीब बताता हूं क‍ि आप आसपास के मुखियाओं को इकट्ठा करके राजधानी की ओर प्रस्थान करें'। सलाह के अनुसार सभी राजधानी की ओर चल दिए। तेनालीराम भी उनके साथ थे।

राजा को उनकी बात समझते देर नहीं लगी कि यह तेनालीराम की तरकीब है। राजा ने पूछा सच-सच बताओ कि तुम्हें यह अक्ल किसने दी है?

'राजन! थोड़े दिन पहले हमारे गांव में एक परदेशी आकर रुका था, उसी ने हमें यह तरकीब बताई है', आगंतुक ने जवाब दिया। सारी बात सुनकर राजा स्वयं रथ पर बैठकर राजधानी से बाहर आए और ससम्मान तेनालीराम को दरबार में वापस लाए। गांव वालों को भी पुरस्कार देकर विदा किया।



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