तेनालीराम की कहानियां : खूंखार घोड़ा


‘कायर कहीं के, तुम क्या जानो घोड़े कैसे काबू में किए जाते हैं? यह तो हम सैनिकों का काम है’, कहकर प्रबंधक ने दीवार के छेद में से झांकने की कोशिश की।


सबसे पहले उसकी दाढ़ी छेद में पहुंची। इधर भूखे घोड़े ने समझा कि उसका चारा आ गया और उसने झपटकर दाढ़ी मुंह में ले ली। प्रबंधक का बुरा हाल था। वह दाढ़ी बाहर खींच रहा था लेकिन घोड़ा था कि छोड़ता ही न था।

प्रबंधक दर्द के मारे जोर से चिल्लाया। बात राजा तक जा पहुंची। वह अपने कर्मचारियों के साथ दौड़े-दौड़े वहां पहुंचे। तब एक कर्मचारी ने कैंची से प्रबंधक की दाढ़ी काटकर जान छुड़ाई।






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