तेनालीराम की कहानियां : खूंखार घोड़ा

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राजा ने से पूछा, ‘तुम्हारा घोड़ा कहां है?’

‘महाराज, मेरा घोड़ा इतना खूंखार हो गया है कि मैं उसे नहीं ला सकता। आप घोड़ों के प्रबंधक को मेरे साथ भेज दीजिए, वही इस घोड़े को ला सकते हैं।’ तेनालीराम ने कहा।

घोड़ों का प्रबंधक, जिसकी दाढ़ी भूसे के रंग की थी, तेनालीराम के साथ चल पड़ा।

कोठरी के पास पहुंचकर तेनालीराम बोला, ‘प्रबंधक, आप स्वयं देख लीजिए कि यह घोड़ा कितना खूंखार है इसीलिए मैंने इसे कोठरी में बंद कर रखा है।’



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