तेनालीराम की कहानियां : तेनालीराम और चोटी का किस्सा

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राजा ने की बात मान ली। तेनालीराम ने आदरपूर्वक राजगुरु से कहा, ‘राजगुरुजी, महाराज को आपकी चोटी की आवश्यकता है। इसके बदले आपको मुंहमांगा इनाम दिया जाएगा।’


राजगुरु को काटो तो खून नहीं। वर्षों से पाली गई प्यारी चोटी को कैसे कटवा दें? लेकिन राजा की आज्ञा कैसे टाली जा सकती थी।

उसने कहा, ‘तेनालीरामजी, मैं इसे कैसे दे सकता हूं।’
‘राजगुरुजी, आपने जीवनभर महाराज का नमक खाया है। चोटी कोई ऐसी वस्तु तो है नहीं, जो फिर न आ सके। फिर महाराज मुंहमांगा इनाम भी दे रहे हैं…।’



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