सिंहासन बत्तीसी : चौबीसवीं पुतली करुणावती की कहानी

WD|

जब राजा कुछ नहीं बोले तो उसे शक हुआ और उसने नकली दाढ़ी-मूंछ नोच ली। किसी अन्य पुरुष को पाकर 'चोर-चोर' चिल्लाने लगी तथा राजा को अपने पति का हत्यारा बताकर विलाप करने लगी। राजा के सिपाही और नगर कोतवाल नीचे छिपे हुए थे।


वे दौड़कर आए और राजा के आदेश पर उस हत्यारी चरित्रहीन स्‍त्री को गिरफ्तार कर लिया। उस स्‍त्री को समझते देर नहीं लगी कि भेष बदलकर आया हुआ पुरुष खुद विक्रम थे। उसने झट से विष की शीशी निकाली और विषपान कर लिया।

(समाप्त)





और भी पढ़ें :