सिंहासन बत्तीसी : चौबीसवीं पुतली करुणावती की कहानी

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ऐसे ही एक रात विक्रम वेश बदलकर राज्य के एक हिस्से में घूम रहे थे कि उन्हें एक बड़े भवन से लटकता एक कमन्द नज़र आया। इस कमन्द के सहारे ज़रूर कोई चोर ही ऊपर की मंज़िल तक गया होगा, यह सोचकर वे कमन्द के सहारे ऊपर पहुंचे।

उन्होंने अपनी तलवार हाथों में ले ली ताकि सामना होने पर चोर को मौत के घाट उतार सकें। तभी उनके कानों में स्‍त्री की धीमी आवाज़ पड़ी 'तो चोर कोई स्‍त्री है', यह सोचकर वे उस कमरे की दीवार से सटकर खड़े हो गए जहां से आवाज़ आ रही थी।

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