सिंहासन बत्तीसी : छब्बीसवीं पुतली मृगनयनी की कहानी

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राजा ने जब उस युवक से उसका परिचय पूछा और जानना चाहा कि यह धन उसके पास कैसे आया तो उस युवक ने बताया कि वह एक धनाढ्य स्‍त्री के यहां नौकर है और सारा धन उसी स्‍त्री का दिया हुआ है।

अब राजा की जिज्ञासा बढ़ गई और उन्होंने जानना चाहा कि उस स्‍त्री ने उसे यह धन क्यों दिया और वह धन लेकर कहां जा रहा था?

इस पर वह युवक बोला कि अमुक जगह रुककर स्‍त्री ने प्रतीक्षा करने को कहा था। दरअसल उस स्‍त्री के उससे अनैतिक सम्बन्ध हैं और वह उससे पति की हत्या करके आकर मिलने वाली थी।

दोनों सारा धन लेकर कहीं दूर चले जाते और आराम से जीवन व्यतीत करते।

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