मुंबई हमला, पुलिस अधिकारी ने मानी गलती

मुंबई (भाषा)| भाषा| पुनः संशोधित सोमवार, 26 अक्टूबर 2009 (22:52 IST)
पुलिस के एक अधिकारी ने सोमवार को विशेष अदालत के समक्ष स्वीकार किया कि उसने मुंबई हमलों के दौरान निशाना बनाए गए होटल ताज और से बरामद चीजों का लेबल तैयार करने में भारी भूल की थी।


ताज होटल से बरामद चीजों को नरीमन हाउस से मिली वस्तुओं के रूप में दिखाया गया था क्योंकि ‘पंचनामा’ तैयार करने के दौरान दोनों पैकेटों के लेबल बदल गए थे।

कोलाबा पुलिस थाने में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात मानेसिंह प्रयागसिंह पाटिल ने अदालत से कहा कि हो सकता है कि मैंने गलतियाँ की हों क्योंकि मैं बेहद थक चुका था। आतंकवादी हमलों के बाद चार दिन तक मैं घर नहीं जा सका और मैंने 26 नवम्बर के बाद कई दिन 24 घंटे तक ड्यूटी की थी।

आतंकवादी वारदात का निशाना बने ताज होटल और नरीमन हाउस से एके.-47 रायफलें, मैगजीन, गोलियाँ, ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम, मोबाइल फोन तथा कारतूस बरामद किए गए थे।


न्यायाधीश एमएल टाहिलियानी के बरामद की गई एके-47 रायफलों की संख्या के बारे में पूछे जाने पर गवाह इंस्पेक्टर ने कहा कि मुझे याद नहीं है। इस पर न्यायाधीश ने पाटिल से पूछा कि आप एक वरिष्ठ अधिकारी हैं, आप यह कैसे कह सकते हैं कि आपको कुछ याद नहीं है?
गौरतलब है कि 166 लोगों की मौत की वजह बने मुंबई हमलों के सिलसिले में पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल आमिर कसाब तथा दो भारतीय संदिग्धों फहीम अंसारी और सबाउद्दीन अहमद के खिलाफ मुकदमा चलाया जा रहा है।

गवाह नारायण शेट्टी की उम्र के बारे में पाटिल ने बचाव पक्ष के वकील अब्बास काजमी से कहा कि उसकी उम्र 35 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए, लेकिन पंचनामा तैयार करते वक्त उसकी आयु 66 वर्ष बताई गई थी।
एक अन्य गवाह इयान माइकल पिंटो ने बताया कि हमलों में मारे गए सात विदेशी नागरिकों के शव विमान के जरिये ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, मलेशिया और जर्मनी भेजे गए थे।

इस बीच राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के लेफ्टिनेंट कर्नल आरके शर्मा कल अदालत में हाजिर होकर बताएँगे कि उन्होंने पिछले साल 26 नवंबर को ओबेरॉय होटल में आतंकवादियों से मुकाबला करने वाली टीम का नेतृत्व किस तरह किया था।



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