दूधमुँही बच्ची का निकाह अवैध

शरीयत अदालत ने दी विवाह की मंजूरी

मुजफ्फरनगर (भाषा)| भाषा| पुनः संशोधित शनिवार, 5 जुलाई 2008 (15:19 IST)
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शरीयत अदालत ने यहाँ अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में 20 वर्ष पूर्व एक वर्षीय लड़की नफीसा का दो वर्ष के लड़के जब्बार से हुए निकाह को गैर कानूनी घोषित कर लड़की को अपना नया जीवन शुरू करने की स्वीकृति दे दी।


अदालत ने माना कि नाबालिग बच्चे के निकाह के लिए उसके कानूनी वली (अभिभावक) की स्वीकृति नहीं ली गई थी। इस अवसर पर अदालत में लड़की तथा उसकी माँ उपस्थित थीं।

शरीयत अदालत सूत्रों के अनुसार दूधमुँही से जवान हुई नफीसा की याचिका पर गहन विचार कर शरीयत कानून की दृष्टि से याचिका को स्वीकार कर उसे अपना नया जीवन आरम्भ करने के लिए उसे दूसरी शादी करने की इजाजत दे दी।

अदालत ने माना यह निकाह शरीयत कानून के अनुसार अवैध था, क्योंकि उसके लिए उसके कानूनी वली पिता की स्वीकृति नहीं ली गई थी।


पिता के रहते दादा वली की हैसियत नहीं रखता। नफीसा का निकाह उसके दादा फैयाज ने 20 वर्ष पूर्व तब करा दिया था, जब वह एक वर्ष की थी तथा लड़का दो वर्ष का था। लड़की के जवान होने पर उसने अपना नया जीवन शुरू करने के लिए तलाक माँगा था।
मुजफ्फरनगर जिले के कस्बा कैराना में मुस्लिम गूजर परिवार की 20 वर्षीय लड़की नफीसा ने शरीयत अदालत में याचिका दायर कर कहा था कि जब वह एक वर्ष की थी तब उसके दादा फैयाज ने उसका निकाह ग्राम बराला निवासी अपने मित्र मुनव्वर के दो वर्षीय पुत्र जब्बार से करा दिया था।

लड़की ने जब होश संभाला तो उसको मालूम पड़ा कि उसका एक पति भी है, जब वह बालिग हुई तो उसके दादा व पिता की मृत्यु हो चुकी थी। वह अपनी माँ जव्वारी बेगम के पास रह रही है। वह अपनी मर्जी से जीवन साथी चुन्ना चाहती है इस कारण उसने दूसरी शादी के लिए इजाजत माँगी थी।
याचिका के पक्ष में उसने दो गवाह अदालत में प्रस्तुत किए। पीड़िता लड़की के बयानों के आधार पर मालूम पड़ा कि नाबालिग लड़के के पिता होते हुए दादा ने बिना उसके पिता की स्वीकृति के निकाह पढ़वा दिया था।

इस निकाह से पिता व माँ भी सहमत नहीं थे, परन्तु संयुक्त परिवार में प्रभावशाली परिवार के मुखिया दादा के सामने माता पिता की नहीं चली। शरीयत कानून के अनुसार पिता के रहते दादा वली (अभिभावक) नहीं हो सकता। नाबालिग लड़की के निकाह की पिता की इजाजत आवश्यक थी। शरीयत कानून में ऐसा निकाह वैध नहीं था।
शरीयत अदालत ने तमाम तर्कों को सुनने के बाद 20 वर्ष पूर्व नफीसा के निकाह को अवैध मानते हुए उसकी याचिका स्वीकार कर दूसरी शादी करने की स्वीकृति प्रदान कर दी। इस अवसर पर लड़की नफीसा व उसकी माँ जव्वारी बेगम अदालत में उपस्थित थीं।

उल्लेखनीय है कि विश्व की प्रसिद्ध इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम देवबंद ने जब्बार (22) और नफीसा का भविष्य तय करने के लिये लड़की को शरीयत अदालत जाने के लिए कहा था।
इस पर नफीसा ने शरीयत अदालत में याचिका दायर कर जव्वार से तलाक लेकर दूसरी शादी करने की इजाजत इस अदालत से माँगी थी। शरीयत कानून के अनुसार नाबालिग बच्चों का निकाह जायज तो है, लेकिन बालिग होने पर बचपन में हुए निकाह को लड़की अस्वीकार कर सकती है।

शरीयत अदालत में ऐसी कई महिलाओं के मामले लंबित हैं, जिनके पति वर्षों से लापता हैं। ऐसी महिलाओं ने तलाक की याचिका पर दूसरी शादी करने की इजाजत माँगी है।



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