मंत्रियों को बंधक बनाना चाहते थे आतंकी

26/11 मामले में खुलासा

मुंबई (भाषा)| भाषा| पुनः संशोधित शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2009 (21:55 IST)
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मुंबई पर 26 नवंबर को हुए आतंकवादी हमले में शामिल आतंकवादियों को उनके पाकिस्तानी आकाओं ने कहा था कि वे होटल ताज में मंत्रियों और वीआईपी की तलाश करें और कमरे में आग लगाने से पहले उन्हें बंधक बना लें।


इसका खुलासा शुक्रवार को अदालत में आतंकवादियों और उनके पाकिस्तानी आकाओं के बीच हुई चार टेलीफोनिक वार्ताओं की सीडियों के जरिए किया गया। विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम ने अदालत को सूचित किया कि इस बातचीत को पुलिस ने बीच में ही पकड़ कर रिकॉर्ड कर लिया था।

एक आतंकवादी से दूसरी ओर से कहा गया कि वे होटल ताज में बंधक बनाए गए लोगों से परिजनों से कहें कि वे अगर अपने इष्टों की जान सलामत चाहते हैं तो सेना से अभियान बंद करने को कहें।

एक अन्य बातचीत में एक आतंकवादी से कहा गया कि उन्होंने कुबेर नौका को क्यों नहीं डुबोया। इसी नौका के जरिये आतंकवादी से मुंबई आए थे। आतंकवादियों ने जवाब दिया कि उनके पास समय नहीं था और अन्य नौका ने उनसे संपर्क किया और उन्होंने सोचा कि वह नौसेना थी, जो उनका पीछा कर रही थी।

आतंकवादियों से यह भी कहा गया कि वे अपने ऊपर के कमरों में आग लगा दें ताकि सेना को वहाँ हेलिकॉप्टर से पहुँचने से रोका जा सके और उनसे यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि आग फैले क्योंकि यह उनकी मदद करेगा।

पुलिस का कहना है कि पाकिस्तानी आका टेलीविजन देख रहे थे और ताज तथा ओबेराय होटल पर कब्जा करने वाले आतंकवादियों को निर्देश दे रहे थे।
बातचीत के दौरान तीन आतंकवादियों अबू अली, अबू उमर और अब्दुल रहमान वादा का नाम सामने आया था। यह भी सामने आया कि उनके साथ एक और आतंकवादी अबू साहेब भी था। दूसरी ओर से वाशीभाई और कफाभाई बातचीत कर रहे थे। सीडी दिखाए जाने से पहले निरोधी दस्ते के तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस आयुक्त परमवीरसिंह ने अदालत से कहा कि उन्होंने आतंकवादियों और उनके पाकिस्तानी आकाओं के बीच टेलीफोन पर बातचीत को इंटरसेप्ट करने की अनुमति दी।
सिंह ने कहा कि एक कनिष्ठ अधिकारी ने उन्हें सूचित किया था कि आतंकवादी चार मोबाइल फोनों का इस्तेमाल कर रहे थे और पुलिस यह जानने के लिए उनकी बातचीत को इंटरसेप्ट करना चाहती थी कि वे किससे बातचीत कर रहे हैं।



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