मुजफ्फरनगर दंगा : दो भाजपा विधायकों सहित दस पर रासुका

-लखनऊ से अरविन्द शुक्ला

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लखनऊ। मुजफ्फरनगर दंगों के सिलसिले में अब तक भाजपा के दो विधायकों सहित दस अभियुक्तों के खिलाफ रासुका के तहत मामला दर्ज किया जा चुका है, जबकि आठ अन्य अभियुक्तों के विरुद्ध रासुका लगाए जाने की कार्रवाई चल रही है


महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) राजकुमार विश्वकर्मा ने बताया कि भाजपा विधायक के बाद गुरुवार को इसके एक अन्य विधायक सुरेश राणा पर भी रासुका लगा दी गई है।
उन्होंने बताया कि मुजफ्फरनगर दंगों के सिलसिले में अब तक कुल दस लोगों के विरुद्ध रासुका लगा दी गई है और उन्हें इस संबंध में वारंट दिए जा चुके हैं, जबकि आठ अन्य के खिलाफ रासुका लगाने की कार्रवाई चल रही है।


विश्वकर्मा ने बताया कि दंगों के बाद से मुजफ्फरनगर एवं आसपास के जिलों में 1826 शस्त्र लाइसेंस निरस्त किए जा चुके हैं, जबकि 2013 शस्त्रों के लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया चल रही है।

कार्यवाही पर बिफरे प्रदेश अध्यक्ष : सुरेश राणा व संगीत सोम पर एनएसए की कार्यवाही होने पर बिफरे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने कहा कि उत्तरप्रदेश की सपा सरकार प्रदेश को साम्प्रदायिक आधार पर बांटना चाहती है। संप्रदाय विशेष को खुश करने के लिए अखिलेश सरकार किसी भी हद तक जा सकती है।

राज्य सरकार की नीयत साफ नहीं : राष्‍ट्रीय लोकदल महासचिव एवं लोकसभा सांसद जयन्त चौधरी ने हाल ही में मुजफ्फरनगर हिंसा के दौरान ड्‌यूटी पर लगाए गए पुलिस अधिकारियों के छुट्‌टी पर जाने के घटनाक्रम को अनुचित बताते हुए राज्य सरकार की निन्दा की। उन्‍होंने कहा, इस पूरे घटनाक्रम से प्रतीत हो रहा है कि मुजफ्फरनगर हिंसा पर राज्य सरकार की नीयत साफ नहीं है और न ही वह गंभीर है।
स्टिंग ऑपरेशन की जांच कराएं : भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने एक प्रतिष्ठित चैनल की स्टिंग ऑपरेशन की जांच विधानसभा के सदस्यों की समिति द्वारा कराए जाने पर तीखा विरोध किया है। उन्‍होंने कहा कि सरकार का यह कदम उसे कठघरे में खड़ा करता है। स्टिंग ऑपरेशन की निष्पक्ष जांच कराने पर सरकार ईमानदार होती तो सरकार प्रेस काउंसिल या न्यायालय से अनुरोध करती।
दागी अधिकारियों से परहेज नहीं : भारतीय जनता पार्टी मुख्‍यालय में पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. चन्द्र मोहन ने कहा कि अखिलेश यादव सरकार द्वारा आईपीएस मुकुल गोयल को प्रदेश के एडीजी कानून व्यवस्था की कमान देना, भ्रष्टाचार को प्राथमिकता देना है एवं ईमानदार अधिकारियों का मनोबल तोड़ना है।

डॉ. चन्द्र मोहन ने कहा, मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में 2006 में बहुचर्चित 30 हजार कांस्टेबल भर्ती घोटाले में आईपीएस मुकुल गोयल भी जांच में दोषी पाए गए थे और उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज हुई थी।



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