आईएईए से बात कर सकेगी सरकार

वामपंथी दलों ने सरकार को हरी झंडी दिखाई

नई दिल्ली (वार्ता)| वार्ता|
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वामपंथी दलों ने संप्रग सरकार को भारत-अमेरिका परमाणु करार के संबंध में भारत केन्द्रित सुरक्षा उपायों पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) से बातचीत की शुक्रवार को अनुमति दे दी। यद्यपि शर्त यह है कि सरकार केवल बातचीत करेगी, आईएईए से समझौता संप्रग वाम समिति के अनुमोदन के बाद ही होगा।


अंतरराष्ट्रीय परमाणु निगरानी निकाय से औपचारिक वार्ता की शुरुआत को अब तक परमाणु करार पर अमल की दिशा में पहला कदम बताते रहे वामदलों को यहाँ समिति की छठी बैठक में आखिरकार संप्रग यह समझाने में सफल रहा कि बातचीत की शुरुआत करार पर अमल नहीं है।

वामदलों के रुख में इस प्रत्यक्ष बदलाव को पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम के हाल के घटनाक्रम के बाद इन दलों पर हो रहे चौतरफा हमलों का नतीजा माना जा रहा है।

वैसे भाकपा महासचिव एबी बर्धन तथा फारवर्ड ब्लॉक के महासचिव देवब्रत विश्वास ने विदेश मंत्रालय में करीब दो घंटे चली बैठक से निकलते हुए इस बात से इनकार किया कि परमाणु करार पर उनके विरोधी तेवर में कोई नरमी आई है। दोनों नेताओं ने कहा कि हमने केवल आईएईए से औपचारिक बातचीत शुरू करने की अनुमति दी है, सुरक्षा उपायों पर समझौते पर हस्ताक्षर की अनुमति नहीं।

मुखर्जी ने कहा कि परमाणु करार पर अमल से पहले समिति के निष्कर्षों पर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने आईएईए से औपचारिक वार्ता शुरू करने के औचित्य पर वक्तव्य में कहा कि 123 समझौते एवं भारतीय विदेश नीति पर अमेरिकी हाइड कानून के प्रावधानों के असर पर विचार-विमर्श किया गया।

समिति ने माना कि परमाणु सुरक्षा एवं निगरानी उपायों पर हाइड कानून तथा 123 समझौते के प्रभाव के अध्ययन के लिए आईएईए सचिवालय से बातचीत करना जरूरी है।



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