महिला आरक्षण पर महाभारत

नई दिल्ली (वार्ता)| वार्ता| पुनः संशोधित मंगलवार, 6 मई 2008 (16:14 IST)
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करीब 12 वर्ष से सियासत की दाँवपेंच में फँसा महिला आरक्षण विधेयक मंगलवार को अभूतपूर्व हंगामे और हाथापाई के बीच राज्यसभा में पेश कर दिया गया।


नौबत यहाँ तक आ गई कानून मंत्री हंसराज भारद्वाज से समाजवादी पार्टी के कुछ सदस्यों ने विधेयक की प्रति छीनने की कोशिश तक की तथा भारद्वाज बचाव में आए सत्तापक्ष के सदस्यों से गुत्थमगुत्था हो गए।

खचाखच भरे सदन में प्रधानमंत्री एवं सदन के नेता मनमोहनसिंह की मौजूदगी में माहौल इतना अराजक हो गया कि पीठासीन उपसभापति पीजे कुरियन भी हक्का-बक्का रह गए अजीबोगरीब तमाशा देखते रह गए।

एक तरफ भारद्वाज को बचाने के लिए उनके सहयोगी मंत्री विलास मुत्तमवार, अंबिका सोनी और कुमारी शैलजा इर्द-गिर्द घेरा डाले हुए थीं तो दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के अबू आसिम आजमी का आक्रामक रुख रोके नहीं रुक रहा था।


महिला एवं बाल विकास मंत्री रेणुका चौधरी मंत्रियों की सीटों तक चढ़ आए सपा सदस्यों से मोर्चा लेने के लिए घुस गईं और कइयों को धक्का देते हुए पीछे किया। कांग्रेस के हनुमंत राव को आजमी का कुर्ता पकड़कर उन्हें पीछे खींचते देखा गया। इस बीच भाजपा के मुख्य सचेतक एसएस अहलूवालिया भी वहाँ पहुँच गए और उन्होंने आजमी को अपने स्थान पर जाने के लिए कहा।
इससे पहले समाजवादी पार्टी के सदस्य महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता राज ठाकरे के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सभापति के आसन के पास जमा होकर नारेबाजी कर रहे थे। संभवत: उनका यह जमावड़ा महिला आरक्षण विधेयक की प्रति छीनने की उनकी रणनीति का हिस्सा था ताकि वे कानून मंत्री को विधेयक पेश करने से रोक सके।

लोकसभा सदस्यों की दीर्घा इस प्रकरण के दौरान खचाखच भरी थी। इस ड्रामे के दौरान ही महिला आरक्षण विधेयक पेश कर दिया गया तथा कुरियन ने सदन की कार्यवाही दो बजे तक स्थगित करने की घोषणा कर दी।



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