सीलिंग अध्यादेश वैधता की जाँच का फैसला

नई दिल्ली (वार्ता)| वार्ता|
उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली में अवैध निमार्णों, अतिक्रमणों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को सीलिंग से बचाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी अध्यादेश की वैधता की जाँच का फैसला किया है।


न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत, न्यायमूर्ति सीके ठक्कर और न्यायमूर्ति लोकेश्वर सिंह की पीठ ने दिल्ली प्रदेश नागरिक परिषद (डीपीसीसी) द्वारा दायर याचिका पर केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को नोटिस जारी किए।

राष्ट्रीय राजधानी में झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों सैनिक फॉर्म, शैक्षणिक संस्थानों और गोदामों के साथ-साथ अवैध निमार्णों और अतिक्रमणों की सीलिंग 31 दिसम्बर 2008 तक नहीं करने संबंधी अध्यादेश की संवैधानिक वैधता को याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई है।

उच्चतम न्यायालय ने संबंधित मंत्रालय और एमसीडी को अपने जवाब एक नवंबर तक दायर करने के निर्देश दिए हैं जिस पर याचिकाकर्ता अपना पक्ष 12 नवंबर को दाखिल कर सकेंगे। याचिका के साथ ही मुख्य मामले की सुनवाई 13.14 और 15 नवंबर को होगी।


अध्यादेश के कारण पूरे शहर में 1500 अनधिकृत और अनियमित कालानियों में फैले वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों की सीलिंग पर भी रोक लग गई है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि अध्यादेश न केवल असंवैधानिक है, बल्कि यह उच्चतम न्यायालय के आदेशों को निष्प्रभावी करने के लिए लाया गया है।
याचिकाकर्ता के अनुसार अध्यादेश दिल्ली में कानून का पालन करने वाले नागरिकों की कीमत मूल्य पर कानून का उल्लंघन करने वाले बिल्डरों, भूमाफियाओं और प्रापर्टी डीलरों को बचाने के लिए लाया गया है।

उच्चतम न्यायालय दिल्ली के 2021 मास्टर प्लान की वैधता की जाँच कर रहा है। अध्यादेश उच्चतम न्यायालय के शहर के विभिन्न क्षेत्रों में 1500 अनधिकृत कालोनियों में सभी प्रकार की गतिविधियों पर रोक संबंधी आदेश के बाद लाया गया था।



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