अमेरिका को उम्मीद करार होकर रहेगा

नई दिल्ली (वार्ता)| वार्ता|
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अमेरिका के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ, विचारक और मानवाधिकार कार्यकर्ता रेवरेंड जेसेस एल जैकसन ने विश्वास व्यक्त किया है कि भारत-अमेरिका परमाणु समझौता हो जाएगा लेकिन इससे प्रेरित होकर अन्य देशों के बीच भविष्य में होने वाले समझौतों के उचित इस्तेमाल पर शक है।


वैश्विक सुरक्षा की दृष्टि से परमाणु निरस्त्रीकरण समय की जरूरत है और परमाणु शक्ति का इस्तेमाल ऊर्जा के लिए किया जाना उचित तो है लेकिन इसके सही इस्तेमाल की विश्वसनीयता संदिग्ध है।

अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से दो बार राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल हो चुके जैकसन ने शुक्रवार को यहाँ प्रेस कांप्रेंस में समझौते के बारे में पूछे गए सवाल पर यह बात कही।

जैकसन ने कहा कि उन्हें लगता है कि भारत और अमेरिका के बीच अंततः समझौता हो जाएगा लेकिन इससे प्रेरित होकर अन्य देशों के बीच भविष्य में होने वाले समझौतों के उचित रूप में इस्तेमाल किए जाने पर संदेह है।


उन्होंने कहा कि वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से परमाणु निरस्त्रीकरण समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि परमाणु शक्ति का इस्तेमाल ऊर्जा के लिए किया जाना उचित तो है लेकिन इसके सही इस्तेमाल की विश्वसनीयता संदिग्ध है।
महात्मा गाँधी के भारत और परमाणु शक्ति सम्पन्न भारत के बीच विषमता के सवाल पर जैकसन ने कहा कि गाँधीजी का सत्याग्रह मानवता को मजबूत बनाता है जबकि परमाणु शक्ति समाज की कमजोरी का परिचायक है।

उन्होंने कहा कि दशकों पहले अमेरिका परमाणु शक्ति से लैस हो चुका था और आज वह भले ही दुनिया का सबसे ताकतवर देश हो लेकिन उनकी नजर में पूँजी के केंद्रीकरण के कारण वहाँ गरीबी में निरंतर बढ़ोतरी हुई है।
भारत के बाद पाकिस्तान जाने पर राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ और पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो को दिए जाने वाले संदेश के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह गत तीन नवंबर को आपातकाल लगाए जाते ही इसका विरोध कर चुके हैं। वह एक बार फिर जनरल मुशर्रफ से आपातकाल विरोधियों को जेल से रिहा करने, मानवाधिकार बहाल करने और लोकतांत्रिक प्रकिया मजबूत करने की अपील करेंगे।



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