'साहित्य जगत में काफी सम्मान था'

नई दिल्ली (भाषा)| भाषा| पुनः संशोधित शुक्रवार, 21 दिसंबर 2007 (21:10 IST)
हरिवंश राय बच्चन के संघर्ष के दिनों के साक्षी रहे वरिष्ठ साहित्यकारों का कहना है कि तेजी बच्चन सीधे तौर पर तो साहित्य से नहीं जुड़ी रहीं, लेकिन साहित्यिक गतिविधियों में रुचि होने के कारण साहित्यकारों के बीच वे खासी लोकप्रिय रहीं। यही नहीं बच्चन को नेहरू परिवार के करीब लाने में भी तेजी की अहम भूमिका थी।

उन्हें याद करते हुए ज्ञानपीठ के कार्यकारी निदेशक रवीन्द्र कालिया ने कहा कि उन्हें साहित्य संस्कृति और कला की गहरी समझ थी। नेहरू परिवार के साथ उनका गहरा जुड़ाव रहा। उनकी साहित्य समझ के चलते साहित्यकारों के बीच उन्हें बड़ा सम्मान दिया जाता रहा है।

साहित्यकार राजेन्द्र यादव ने तेजी बच्चन को याद करते हुए भाषा को बताया कि तेजी बच्चन बड़ी ही व्यवस्थित और सुसंस्कृत तथा सारे घर को संभालने वाली महिला थीं।
यादव ने कहा कि तेजी बच्चन की सुगढ़ता ने बच्चनजी को पारिवारिक मामलों से एकदम निश्चिंत कर दिया था। वह नए कवियों को प्रोत्साहित किया करती थीं। अजीत कुमार जैसे कई कवि एक तरह से उनके घर का हिस्सा बन गए थे। अमिताभ की सफलता के पीछे भी उन्हीं का हाथ था।

उन्होंने कहा कि बच्चनजी से उनका परिचय बड़े ही रोमांटिक अंदाज में कविता के जरिए हुआ था। नेहरू परिवार से उनकी नजदीकी रही और वह इंदिरा गाँधी की बड़ी अच्छी मित्र थीं।
बच्चन परिवार की कर्मभूमि इलाहाबाद से साहित्यकार और वरिष्ठ पत्रकार नरेश मिश्र ने फोन पर बताया कि तेजी बच्चन का जन्म एक सिख परिवार में पाकिस्तान के फैसलाबाद में हुआ था इसके बावजूद हिन्दी साहित्य की उनकी समझ उन्हें बच्चनजी के करीब ले आई।

मिश्र ने कहा कि तेजी बच्चन सुसंसकृत पढ़ी-लिखी और उच्च विचारों वाली महिला थीं। एक पुरुष की सफलता के पीछे महिला का हाथ होता है, तेजी बच्चन इस बात का जीता-जागता उदाहरण थीं। इंदिरा गाँधी से उनकी घनिष्ठता फीरोज से विवाह के पहले से थी और हरिवंशराय बच्चन को वही नेहरू परिवार के करीब लाईं।



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