निष्पक्ष समिति करे चुनाव आयुक्तों का चयन

नई दिल्ली (वार्ता)| वार्ता| पुनः संशोधित रविवार, 1 फ़रवरी 2009 (22:32 IST)
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एन. गोपालस्वामी की चुनाव आयुक्त नवीन चावला को पद से हटाने की सिफारिश को सरकार द्वारा नजरअंदाज किए जाने की अटकलों के बीच चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति सरकार की बजाय निष्पक्ष समिति द्वारा किए जाने की माँग एक बार फिर जोर पकड़ रही है।


विशेषज्ञों का मानना है सरकार को गोस्वामी चुनाव सुधार समिति तथा संविधान के काम-काज का जायजा लेने के लिए गठित आयोग की सिफारिशों को लागू करना चाहिए, ताकि आयुक्तों की नियुक्ति के लिए निष्पक्ष समिति गठित की जाए।

साथ ही विशेषज्ञों का मानना है कि इन सिफारिशों के अनुरूप चुनाव आयुक्तों के पद मुक्त होने के बाद उन्हें दोबारा सार्वजनिक पदों पर नियुक्त किए जाने पर भी रोक लगना चाहिए।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त बीबी टंडन ने हालाँकि में चल रहे मतभेदों के बारे में कुछ भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए एक कोलेजियम बनाने का सुझाव दिया था, जिसमें प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष तथा विपक्ष के नेता मिलकर मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन करें, लेकिन वह प्रस्ताव जस का तस रहा।

चुनाव आयोग के पूर्व सलाहकार तथा चर्चित चुनाव अधिकारी केजे राव ने कहा कि सरकार को चुनाव आयुक्तों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव सुधारों को लागू करने के वास्ते तुरंत कदम उठाना चाहिए। साथ ही उन्होंने चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल पूरा होने पर उन्हें सार्वजनिक पदों पर नियुक्त किए जाने पर रोक लगाए जाने की सिफारिश को लागू करने का भी सुझाव दिया।
राव ने चुनाव आयुक्तों के बीच चल रहे विवाद पर सीधी टिप्पणी से बचते हुए कहा कि चुनाव सुधारों विशेष तौर पर चुनाव आयुक्तों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए तुरंत कदम उठाए जाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा गोस्वामी समिति की सिफारिशों के आधार पर लाया गया संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो पाया था, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति तथा राज्यसभा के पदेन सभापति, विपक्ष के नेता तथा लोकसभा के अध्यक्ष के साथ विचार-विमर्श से किए जाने का प्रस्ताव था, लेकिन विधेयक पारित नहीं हो पाया। जरूरत तुरंत चुनाव सुधारों को लागू करने की है।
बाद में संविधान के काम-काज का जायजा लेने के लिए गठित आयोग ने भी मुख्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति, विपक्ष के नेता लोकसभा अध्यक्ष के साथ-साथ उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश की समिति द्वारा चयन किए जाने की सिफारिश की थी, लेकिन मामला तब भी आगे नहीं बढ़ पाया।

राव ने कहा सरकार को चुनाव सुधार तुरंत लागू करना चाहिए तथा चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल पूरा होने पर उनके दोबारा सार्वजनिक पदों पर नियुक्त करने पर भी रोक लगना चाहिए।



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