माइक्रोसॉफ्ट नहीं खरीदेगा याहू

न्यूयॉर्क (वार्ता) | वार्ता| पुनः संशोधित बुधवार, 7 मई 2008 (11:16 IST)
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माइक्रोसॉफ्ट कारपोरेशन का इंटरनेट सर्च इंजन के बेताज बादशाह गूगल को चुनौती देने के लिए लोकप्रिय पोर्टल याहू खरीदने का सपना चकनाचूर हो गया है। इस खरीद पर करीब पाँच माह तक चली जद्दोजहद के बाद मनमानी कीमत देने से इंकार कर अंततः उसने 6 मई को इस सौंदे से हाथ खींच लिए।


माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यकारी स्टीव बालमेर ने इस संबंध में जारी एक बयान में कहा है कि इस खरीद को सफल बनाने के हमारे भरसक प्रयास के बावजूद जब याहू तैयार नहीं हुआ तो हमने पहले लगाई गई बोली में करीब पाँच अरब डॉलर की राशि और बढ़ाई लेकिन याहू इससे भी अधिक धन की माँग पर अड़ा रहा, इसलिए हमने इस सौदे से हाथ खींचने का निर्णय लिया है।
दुनिया के सबसे बड़े सॉफ्टवेयर निर्माता माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कहा कि उन्होंने पहले निर्धारित प्रति शेयर की दर याहू की मंशा को देखते हुए पाँच डॉलर प्रति शेयर बढ़ाकर 33 डॉलर करने का भी प्रस्ताव किया लेकिन याहू के निदेशक मंडल ने उनके इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने बालमेर के हवाले से लिखा है कि इस सौदे पर पूरी तरह और सावधानीपूर्वक सभी पक्षों पर विचार करने के बाद हम इस नतीजे पर पहुँचे हैं कि याहू जितनी रकम माँग रहा है उतनी रकम के भुगतान का हमारे लिए कोई औचित्य नहीं है। यह सौदा माइक्रोसॉफ्ट, उसके शेयर धारकों, कर्मचारियों तथा कंपनी से संबद्ध किसी भी पक्ष के हित में नहीं है, इसलिए इस प्रस्ताव को वापस लेने का निर्णय लिया गया है।

याहू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेरी यांग ने माइक्रोसॉफ्ट के प्रमुख बालमेर को स्पष्ट कह दिया है कि उन्हें प्रति शेयर की दर 37 डॉलर से कम स्वीकार्य नहीं है। याहू के इस फैसले के साथ ही कंपनी के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मँडराने लग गए हैं इसलिए कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट की संभावना नजर आ रही है।

इस सौदे के टूटने से न सिर्फ माइक्रोसॉफ्ट का गूगल को चुनौती देने का सपना टूटा है और बल्कि इससे याहू भी संकट से घिर गया है। उसे डर है कि गूगल उसके लाभ और शेयर मूल्य को प्रभावित न कर बैठे इसलिए उसने माइक्रोसॉफ्ट के विकल्प की तलाश शुरू कर दी है। कंपनी ने टाइम वार्नर की इकाई एओएल तथा न्यूज कॉरपोरेशन की इकाई माईस्पेस के साथ समझौते की पेशकश की है।
माइक्रोसॉफ्ट का संकट यह है कि वह याहू के अधिग्रहण के साथ ही इंटरनेट पर सर्ज इंजन सेवा उपलब्ध कराने वाले गूगल के एकछत्र राज को समाप्त करने का इच्छुक है। वह पहला स्थान प्राप्त करने के लिए अब तक बड़ी रकम खर्च कर चुका है और लंबे समय से इस दिशा में प्रयास भी कर रहा है लेकिन सपना पूरा करने में अब तक उसे कभी कामयाबी नहीं मिली।

इसी कामयाबी को पाने के लिए वह याहू की सवारी करने की ताक में था और याहू उसकी मजबूरी को समझता है इसलिए उसने भी मनमानी रकम ऐंठने में कोताही नहीं की है।
बालमेर ने शनिवार को याहू को भेजे अपने पत्र में कहा है कि उन्हें इस सौदे से अपने हाथ खींचने में ही ज्यादा लाभ है। हालाँकि माइक्रोसॉफ्ट को लगता है कि उनका सौदा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। याहू के शेयरों की कीमत घटेगी तो वह फिर उसके पास आएगा और इस प्रस्ताव को स्वीकार करेगा।



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