भारत को दुश्मन न समझे पाक-ओबामा

वॉशिंगटन| भाषा|
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने से कहा कि उसे को अपना घोर शत्रु नहीं मानना चाहिए और अफगान-भारत संबंधों को लेकर अपने शत्रु भाव को छोड़ देना चाहिए तथा यह अहसास करना चाहिए कि भारत के प्रति शांतिपूर्ण पहल सबके हित में होगी।


ओबामा ने व्हाइट हाउस में कहा कि उसे (पाकिस्तान को) लगता है कि उसके सुरक्षा हित पर स्वतंत्र से खतरा है क्योंकि वे समझते हैं कि वह (अफगानिस्तान) भारत के साथ मिल जाएगा। पाकिस्तान अब भी भारत को अपना घोर शत्रु समझता है।
उन्होंने कहा कि हम जो चाहते हैं उसके तहत एक बात यह है कि पाकिस्तान यह एहसास करे कि भारत के प्रति शांतिपूर्ण पहल ही सबके हित में होगी और वाकई पाकिस्तान को भी इससे विकास में मदद मिलेगी। ओबामा का यह जवाब तब आया जब उनसे पूछा गया कि क्या वे अपने पूर्व शीर्ष सैन्य कमांडर माइक मुलेन के इस आरोप से इत्तफाक रखते हैं कि पाकिस्तान की आईएसआई ने हक्कानी नेटवर्क को अपने प्रामाणिक अंग के रूप में उपयोग किया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि पाकिस्तान जिन बड़ी समस्याओं से जूझ रहा है उनमें एक गरीबी, निरक्षरता, विकास का अभाव और ऐसे नागरिक संस्थानों की कमी है, जो स्थानीय जनता की उम्मीदों पर खरा उतरे। उन्होंने कहा कि और उस माहौल में आप कट्टरपंथ को आगे बढ़ते हुए देख रहे हैं।

आपने देखा है कि आतंकवाद फलफूल रहा है और वह न केवल अफगानिस्तान में हमारे प्रयासों पर बल्कि पाकिस्तानी सरकार और वहां की जनता के लिए भी खतरा बना हुआ है। ओबामा ने कहा कि अतएव, हम जिस विषय पर काम कर रहे हैं वह पुरानी व्यवस्था की बहाली है और यह आसान कार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि हम लगातार पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों का हमेशा इस आधार पर मूल्यांकन करेंगे कि यह अमेरिकियों और हमारे हितों की सुरक्षा में मददगार हो। पाकिस्तानी जनता को उनके अपने समाज एवं अपनी सरकार को मजबूत करने में मदद करने की हमारी गहरी इच्छा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के गलत फैसले के चलते बाढ़ प्रभावितों की सहायता को रोकने पर हिचकिचाएंगे, लेकिन इस बात में कोई शक नहीं कि अगर हम यह नहीं सोचें कि वे हमारे हितों के बारे में भी विचार कर रहे हैं, तो हम पाकिस्तान के साथ दीर्घावधि के रणनीतिक संबंध में आरामदेह महसूस नहीं करेंगे।
पाकिस्तान के संबंध में ओबामा ने कहा कि मैंने कहा कि मेरा प्रथम लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि अलकायदा अमेरिका में हमला नहीं कर सके और दुनियाभर में अमेरिकी हितों को प्रभावित न कर सके। मैं समझता हूं कि हमने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाके में प्रत्यक्ष रूप से अलकायदा का पीछा कर अच्छा काम किया है।

उन्होंने कहा कि एक और सच्चाई यह भी है कि हमारा लक्ष्य यह रहा है कि हम अफगानिस्तान से हटें और वहां एक ऐसी स्थायी सरकार आए जो स्वतंत्र एवं लोकतांत्रिक हो और मानवाधिकार का सम्मान करे, लेकिन मैं मानता हूं कि पाकिस्तान वहां हमारे कुछ लक्ष्यों के प्रति दुविधा का शिकार रहा। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान को समझाया है कि स्थिर अफगानिस्तान उसके हित में है और उसे स्थिर तथा स्वतंत्र अफगानिस्तान से खतरा महसूस नहीं करना चाहिए। (भाषा)



और भी पढ़ें :