भारत आतंकवादियों के निशाने पर

वाशिंगटन| भाषा| पुनः संशोधित शुक्रवार, 31 मई 2013 (14:38 IST)
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वाशिंगटन। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपनी एक रिपोर्ट में की इन चिंताओं को रेखांकित किया है कि पाकिस्तान आधारित आतंकवादी संगठन भारत-पाक संबंधों को सामान्य बनाने में मुख्य अड़चन हैं और कहा है कि भारत लश्कर-ए-तैयबा जैसे कई देशों में सक्रिय आतंकवादी समूहों के हमलों का लगातार निशाना बना हुआ है।


अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने पर 2012 की अपनी कंट्री रिपोर्ट में कहा है कि भारत हिंसक आतंकवादी हमलों का निशाना बना रहा और कई देशों में सरगर्मियां चलाने वाले लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकवादी समूहों के सर्वाधिक लगातार लक्षित देशों में से एक रहा। रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल भारत में आतंकवादी हमलों में 805 लोग मारे गए।
रिपोर्ट में बताया गया है कि मारे गए लोगों की कुल संख्या में वामपंथी हिंसक उग्रवाद से जुड़ी 364 मौतें हैं। उनमें से तकरीबन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी माओवाद या माओवादी, नक्सलवादी हिंसा है जिसे भारत सरकार अपना सर्वाधिक गंभीर आंतरिक सुरक्षा खतरा मानती है। आज की तारीख में उन समूहों ने अमेरिकी या अन्य अंतरराष्ट्रीय हितों को विशेष रूप से लक्षित नहीं किया है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपनी इस रिपोर्ट में कहा है कि 2012 में भारतीय सूत्रों ने जम्मू-कश्मीर में हिंसा और मौतों को सरहद पार कर सरगर्मियां चलाने वाले आतंकवादी समूहों से जोड़ना जारी रखा जिनके बारे में उनका आरोप है कि वे पाकिस्तान समर्थित हैं।


अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान ने 2012 में दो सरकारों के बीच आधिकारिक वार्ता बढ़ाकर, व्यापार रोको को घटाकर और कुछ वीजा आवश्यकताओं में छूट देकर अपने द्विपक्षीय रिश्तों में तनाव घटाने का प्रयास किया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बहरहाल भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा (जम्मू-कश्मीर से लगी सीमा) पर उल्लंघन के जारी आरोपों और पाकिस्तान आधारित आतंकवादी समूहों के बारे में भारत की चिंताएं रिश्ते सामान्य बनाने में अड़चन बनी हुए हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में रेखांकित किया है कि लश्कर-ए-तैयबा और उसके नेता हाफिज सईद समेत भारत-पाकिस्तान के बीच बेहतर रिश्तों के विरोधी आतंकवादी भारत पर हिंसक हमले करने का आह्वान करना जारी रखे हुए हैं।
भारत के आतंकवाद निरोधी उपायों पर रिपोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधी केंद्र की स्थापना के उसके प्रयास उस वक्त ठप पड़ गए, जब कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इन आधारों पर उसकी स्थापना पर एतराज जताया कि यह कानून-व्यवस्था बनाए रखने के राज्यों के संवैधानिक अधिकार और जिम्मेदारियों का अतिक्रमण करते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार कानून प्रवर्तन, खुफिया सेवाओं और अन्य सरकारी एजेंसियों के बीच सूचना की साझेदारी का मंच, राष्ट्रीय खुफिगीरी ग्रिड (नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड) और राष्ट्रीय अपराध रेकार्ड डेटाबेस की स्थापना की 2009 की पहल को वर्ष के अंत तक पूरा नहीं किया जा सका, लेकिन इस दिशा में थोड़ी प्रगति हुई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘क्राइम एंड क्राइम ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स’ अपराध और अपराधियों के बारे में सूचना की ‘रियल-टाइम’ साझेदारी के लिए एक राष्ट्रव्यापी माहौल तैयार करेगा। (भाषा)



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