दिल के सौ-सौ टुकड़े जब होते हैं

NDND
कितनों ही के सर से साया जाता है
जब एक पीपल काट गिराया जाता है

धरती खुद भी खा जाती है फसलों को
चिड़ियों पर इल्जाम लगाया जाता है

प्यासों से हमदर्दी रक्खी जाती है
बादल अपने घर बरसाया जाता है

आज ही उसके दर पे डेरा डालोगे
पहले कुछ दिन आया जाया जाता है

जब शख्सियत आवाजों के ताबे हो
बेमकसद भी शोर मचाया जाता है

झूठे सच्चे ख्वाब खरीदे जाते हैं
पीढ़ी पीढ़ी कर्ज चुकाया जाता है

के सौ-सौ टुकड़े जब हो जाते हैं
जफर गोरखपुर
तब थोड़ा सा दर्द कमाया जाता है।



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