परिसंवाद : साक्षात्कारों का संकलन

साहित्य से संवाद करते साक्षात्कार

Book review
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राजेन्द्र सारथी एक जुझारू के रूप में जाने जाते हैं। लगभग 35 वर्ष का अखबारी दुनिया का अनुभव उनके खाते में दर्ज हैं। इस दौरान उन्हें समाज, व राजनीति से रूबरू होने के अनेक अवसर प्राप्त हुए। राजेन्द्र सारथी एक निर्भीक पत्रकार होने के साथ-साथ संवेदनशील भी हैं।

हाल ही में उनकी पुस्तक 'परिसंवाद' (हरियाणा के प्रतिष्ठित साहित्यकारों के साक्षात्कारों पर आधारित) का प्रकाशन हुआ है। इससे पूर्व उनका एक कविता संग्रह 'कहीं कुछ जल रहा है' भी प्रकाशित हो चुका है जिसका साहित्य जगत में गर्मजोशी से स्वागत हुआ।

सद्यःप्रकाशित पुस्तक 'परिसंवाद' में सारथी जी ने हरियाणा के चुनिंदा बीस साहित्यकारों के साक्षात्कारों को संकलित किया है। विधा का मूल तत्व होता है जो पुस्तक के शीर्षक में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाता है। सारथी जी ने इन साहित्यकारों से प्रत्यक्ष संवाद किया है।

पुस्तक में हरियाणा के हिन्दी साहित्य से जुड़ी अधिकांश प्रतिभाओं को उपयुक्त स्थान मिला है। राज्यकवि उदयभानु हंस, समालोचक डॉ. हरिशचन्द्र वर्मा एवं डॉ. लालचन्द गुप्त 'मंगल' हैं वहीं यशपाल वैद, विकेश निझावन तथा चंद्रकांता जैसे कहानीकार भी शामिल हैं।

नाटककार अमृतलाल मदान, बाल-साहित्यकार घमंडीलाल अग्रवाल तथा ग़ज़लकार माधव कौशिक आदि ने अपनी निजी अनुभूतियों को पाठकों से साझा किया है। लेखक ने प्रभावी सवालों, जैसे आप क्यों लिखते हैं, सृजन प्रक्रिया, हिन्दी प्रकाशन की स्थिति व हिन्दी समीक्षा की वर्तमान दशा आदि से साहित्य जगत के यथार्थ को उदघाटित करने का प्रयास किया है। ‍वरिष्ठ साहित्यकारों के नवोदितों के लिए दिए गए संदेश, वास्तव में महत्वपूर्ण हैं साथ ही अनुकरणीय भी।

लेखक द्वारा साहित्यकारों से किए गए अधिकांश प्रश्न उनके व्यक्तिगत जीवन से संबंधित हैं जो उनके व्यक्तित्व को रेखांकित करने में सक्षम हैं परंतु साहित्यिक व कृतित्व संबंधी प्रश्नों का अभाव खलता है। पुस्तक का मुद्रण भी कमजोर है।

हरियाणा में साक्षात्कार विधा पर पुस्तक का संभवतः यह प्रथम प्रयास है जो अभिनंदनीय है।

पुस्तक :
लेखक : राजेन्द्र सारथी
प्रकाशक : सुकीर्ति प्रकाशन, कैथल
मूल्य : 200 रुपए
कृष्ण कुमार भारती
पृष्ठ : 204



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