अमिताभ की नजर में हरिवंश राय बच्चन

BBC Hindi|
है अंधेरी रात पर दीया जलाना कब मना ह

मेरा दृढ़तापूर्वक मानना है कि यदि उनके व्यक्तित्व को समझना है तो उसके लिए उनके साहित्य को पढ़ना बेहद आवश्यक है। वह एक अद्वितीय व्यक्तित्व हैं।

अमिताभ के शब्दों में मेरे पिता एक गरीब निम्न मध्यवर्गीय परिवार से आए हैं। एक पत्रकार के रूप में उनकी तनख्वाह उस समय पच्चीस रुपए थी। उन्होंने जमीन पर बैठकर लालटेन की रोशनी में पढ़ाई की। लेकिन इससे कभी उनकी लगनशीलता पर असर नहीं पड़ा। उन्होंने अपना पूरा जीवन पढ़ने-लिखने में ही लगाया। सख्त अनुशासन और किसी भी काम के पूरी तत्परता से पूरा करना उनके व्यक्तित्व का ऐसा पहलू रहा जिसका प्रभाव सिर्फ मुझ पर नहीं बल्कि पूरे परिवार पर रहा है।
अपने पिता को जहाँ मैंने हमेशा एक बेहद क्षमतावान, प्रतिबद्ध और ज्ञान से परिपूर्ण शख्सियत के रूप में पाया। आरंभ से से ही उनके व्यक्तित्व का गुण रहा कि जब भी वह कोई हाथ में काम लेते तो अपनी पूरी लगन के साथ उसे निडर होकर पूरा करते हैं।

उनकी यह निडरता उनके लेखन में भी देखने को मिलती है और उनके सोच में भी यही कारण है कि उन्होंने साहित्य में एक नई धारा का प्रवर्तन किया। हालाबाद जिसमें उन्होंने यह समझाया कि मधुशाला के माध्यम से जीवन को किस तरह समझा जा सकता है।
बच्चन के गीत ही नहीं बल्कि कविताएँ भी मर्मस्पर्शी हैं। वे सहज, सरल और मन को छूने वाली कविताएं हैं। उनकी एक ऐसी ही मार्मिक कविता है जो जीवन में आशावाद को जगाता है-

जो बीत गई सो बात कई
जीवन में एक सितारा था
माना वो बेहद प्यारा था
वो छूट गया तो छूट गयाअंबर के आनन को देखो
कितने इसके तारे टूटे
कितने इसके प्यारे छूटे
पर पूछो टूटे तारों से
जब अंबर शोक मनाता है

हरिवंश राय बच्चन के निधन से पूरा हिन्दी समाज शोक संतप्त है, लेकिन उनकी यह कविता मृत्यु पर जीवन की विजय का संदेश हमेशा देती रहेगी।



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