लता मंगेशकर : कुछ रोचक तथ्य

भारतीय सिनेमा जगत में पिछले छह दशक से ने अपनी मधुर आवाज से श्रोताओं को दीवाना बनाया है, लेकिन उनके बारे मे कुछ ऐसे रोचक तथ्य हैं जिनसे ज्यादा लोग परिचित नहीं हैं। पेश है ऐसे ही कुछ रोचक तथ्य :  

बचपन में लता को रेडियो सुनने का बड़ा शौक था। जब वह 18 वर्ष की थी तब उन्होने अपना पहला रेडियो खरीदा और जैसे ही रेडियो ऑन किया तो के.एल.सहगल की मृत्यु का समाचार उन्हें प्राप्त हुआ। बाद में उन्होंने वह रेडियो दुकानदार को वापस लौटा दिया। 
लता को अपने बचपन के दिनों में साइकिल चलाने का काफी शौक था, जो पूरा नहीं हो सका। अलबत्ता उन्होंने अपनी पहली कार 8000 रुपये में खरीदी थी। > > लता को मसालेदार भोजन करने का शौक है और एक दिन में वह तकरीबन 12 मिर्च खा जाती हैं। उनका मानना है कि मिर्च खाने से गले की मिठास बढ़ जाती है।
लता जब हेमंत कुमार के साथ गाने गाती थीं तो इसके लिए उन्हें ‘स्टूल’ का सहारा लेना पड़ता था। इसकी वजह यह थी कि हेमंत कुमार उनसे काफी लंबे थे।

लता फिल्म इंडस्ट्री में मृदु स्वभाव के कारण जानी जाती हैं, लेकिन दिलचस्प बात है कि किशोर कुमार और मोहम्मद रफी जैसे गायकों के साथ भी उनकी अनबन हो गई थी। किशोर कुमार के साथ लता की अनबन का वाकया काफी दिलचस्प है। लता ने इस घटना का जिक्र कुछ इस प्रकार किया है- बांबे टॉकीज की फिल्म ‘जिद्दी’ के गाने की रिकॉर्डिंग करने के लिए जब वह एक लोकल ट्रेन से सफर कर रही थी तो उन्होंने पाया कि एक शख्स भी उसी ट्रेन मे सफर कर रहा है। स्टूडियो जाने के लिए जब उन्होने तांगा लिया तो देखा कि वह शख्स भी तांगा लेकर उसी ओर आ रहा है। जब वह बांबे टॉकीज पहुंची तो उन्होंने देखा कि वह शख्स भी बांबे टॉकीज पहुंचा हुआ है। बाद में उन्हे पता चला कि वह शख्स किशोर कुमार हैं। बाद मे ‘जिद्दी’ में लता ने किशोर कुमार के साथ ‘ये कौन आया रे करके सोलह सिंगार’ गाया।

लता ने मोहम्मद रफी के साथ सैकड़ो गीत गाए थे, लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया था जब उन्होंने रफी से बातचीत करना बंद कर दी थी। लता गानों पर रॉयल्टी की पक्षधर थीं, जबकि मोहममद रफी ने कभी भी रॉयल्टी की मांग नहीं की। दोनों का विवाद इतना बढ़ा कि मोहम्मद रफी और लता के बीच बातचीत भी बंद हो गई और दोनों ने एक साथ गीत गाने से इंकार कर दिया था। हालांकि चार वर्ष के बाद अभिनेत्री नरगिस के प्रयास से दोनों ने एक साथ एक कार्यक्रम में ‘दिल पुकारे’ गीत गाया।

लता महज एक दिन के लिए स्कूल गई। इसकी वजह यह रही कि जब वह पहले दिन अपनी छोटी बहन आशा भोसले को स्कूल लेकर गई तो अध्यापक ने आशा भोसले को यह कहकर स्कूल से निकाल दिया कि उन्हें भी स्कूल की फीस देनी होगी। बाद में लता ने निश्चय किया कि वह कभी स्कूल नहीं जाएंगी। हालांकि बाद में उन्हें न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी सहित छह विश्वविद्यालयों ने मानक उपाधि से नवाजा।

लता को अपने घर में केवल केएल सहगल के गीत गाने की अनुमति मिली थी। उनकी यह ख्वाहिश थी कि वह सहगल से मुलाकात करें और अभिनेता दिलीप कुमार के लिए गाना गाए, लेकिन उनके ये दोनों शौक पूरे नहीं हो सके।

यूं तो लता ने अपने सिने करियर में कई नामचीन अभिनेत्रियों के लिए गायन किया है, लेकिन अभिनेत्री मधुबाला जब फिल्म साइन करती थीं तो अपने कांट्रेक्ट में इस बात का उल्लेख करना नहीं भूलती थी कि उनके गाने लता ही गाएंगी।

लता को अपने सिने करियर में मान-सम्मान बहुत मिले हैं। उन्हें भारत रत्न और दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्राप्त हुआ। उनके अलावा सत्यजीत रे को ही यह गौरव प्राप्त है। वर्ष 1974 में लंदन के सुप्रसिद्ध रॉयल अल्बर्ट हॉल में उन्हें पहली भारतीय गायिका के रूप में गाने का अवसर प्राप्त है।

लता की सबसे पसंदीदा फिल्म द किंग एंड आई है। हिंदी फिल्मों में उन्हें त्रिशूल, शोले, सीता और गीता, दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे और मधुमती पसंद हैं। वर्ष 1943 में रिलीज किस्मत उन्हें इतनी पसंद आई कि उन्होंने इसे लगभग 50 बार देखा था।

लता को मेकअप पसंद नहीं है। उन्हें डायमंड रिंग पहनने का शौक है। उन्होंने अपनी पहली डायमंड रिंग वर्ष 1947 में 700 रुपये में खरीदी थी।

लता अपने करियर के शुरुआती दौर में डायरी लिखने का शौक रखती थी जिसमें वह गाने और कहानी लिखा करती थी बाद में उन्होंने उस डायरी को अनुपयोगी समझ कर उसे नष्ट कर दिया।



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