2009 : नए आविष्कार-नए चमत्कार

2009 में सेहत के लिए हुए अनूठे जतन

स्मृति आदित्य|
जिम से मातृत्व को खतरा
नॉरवेगन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने 3,000 महिलाओं पर अध्ययन करके प्रमाणित किया है कि जिम में जाने वाली महिलाओं के माँ बनने के आसार कम होते हैं।

नकली हाथ असली एहसास
दुर्घटनाओं में बाँहें गँवा देने वाले हजारों लोगों को इस बात से खुशी होगी कि यूरोपीय वैज्ञानिक संवेदनाओं से परिपूर्ण कृत्रिम हाथ विकसित करने में जुटे हैं जिनसे चीजों का असली अहसास हो सकेगा। कृत्रिम हाथ पर यह अनुसंधान स्मार्टहैंड परियोजना के तहत हो रहा है। यूरोपीय संघ इस परियोजना का वित्तपोषण कर रहा है। असली अहसास दिलाने वाले ये नकली हाथ महज परिकल्पना या डिजाइन तक ही सीमित नहीं है। वैज्ञानिकों ने ‘मोटोराइज्ड प्रोस्थेटिक’ हाथ की एक अनुकृति या प्रोटोटाइप भी तैयार कर लिया है। इससे जो फीडबैक मिला है वह अभूतपूर्व है।

स्टेम कोशिका से कैंसर का उपचार

प्रयोगशाला में बनाई गई स्टेम कोशिकाएँ निकट भविष्य में कई प्रकार के ब्लड कैंसर का उपचार कर सकती हैं। जापानी स्टेम कोशिका वैज्ञानिक युकियो नाकामुरा ने बताया कि एप्लास्टिक एनीमिया (लाल रक्त कणिकाओं की कमी और थेलेसेमिया) का स्टेम कोशिका तकनीक से उपचार किया जा सकता है।
टमाटर से पाएँ गठीला बदन
एक अध्ययन में पाया गया था कि टमाटर में प्रचूर मात्रा में मौजूद विटामिन सी से दिल को खूब मदद मिलती है। टमाटर की चटनी और इसके जूस से कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम करने में भी मदद मिलती है। पर अब नए शोध में पाया गया है कि टमाटर शरीर को सदैव एक तरह का गठीला बदन बनाए रखने में बहुत फायदा करता है। इससे शरीर का वजन नहीं बढ़ता। डेली मेल में प्रकाशित खबर के अनुसार टमाटर में समृद्ध कंपाउड पाए जाते हैं। इससे भूख वाले हार्मोन का स्तर बदलता रहता है यह शोध ब्रेड के साथ फल और सब्जी के फायदे के अध्ययन के दौरान किया गया।
एस्प्रिन हो सकती है जानलेवा
चिकित्सा पत्रिका 'ड्रग्स एंड थेराप्यूटिक्स बुलेटिन' डीटीबी में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार नियमित तौर पर एस्प्रिन को लेने के पीछे यह धारणा है कि इससे हृदयाघात या दौरों से बचा जा सकता है लेकिन यह आंतरिक रक्तस्राव सहित पेट की गंभीर समस्याएँ पैदा कर सकती है। डीटीबी के संपादक इके इकियानाचो ने कहा कि पेट में रक्तस्राव घातक हो सकता है। जिन लोगों को कभी दिल का दौरा नहीं पड़ा उनके लिए साक्ष्य इस ड्रग के सेवन की इजाजत नहीं देते। शोधकर्ताओं ने पाया है कि कुछ स्वस्थ लोग हर दिन एहतियात के तौर पर भी एस्प्रिन लेते हैं क्योंकि उन्हें इसके खतरनाक साइड इफेक्ट का पता नहीं होता है।
एक 'किस' सेहत के लिए
हाल में हुए शोध में यह बात सामने आई है कि पूरे आवेग से लिया गया 'किस' एक खास किस्म के कॉम्प्लैक्स केमिकल को दिमाग की तरफ भेजता है। जिससे व्यक्ति खुद को ज्यादा उत्तेजित, खुश अथवा सहज स्थिति में महसूस करता है। स्वस्थ चुंबन सेहत की दृष्टि से भी फायदेमंद है। शोध में पाया गया है कि चुंबन के दौरान हारमोन मुँह के जरिए एक-दूसरे के शरीर में स्थानांतरित होते हैं और तत्काल असर करते हैं।
इस शोध से यह बात सामने आई है कि चुंबन, दरअसल, कहीं ज्यादा जटिल शारीरिक प्रक्रिया है और यह हारमोनल परिवर्तन के लिए जिम्मेदार भी है।शोधकर्ताओं का मानना है कि चुंबन से एक साथ बहुत कुछ घटित होता है। बहरहाल, विशेषज्ञ अब यह जानना चाहते हैं कि महज दो होंठों के स्पर्श से कैसे दिमाग इतना जबर्दस्त इमोशनल रिस्पॉंस देता है। लिहाजा चुंबन के बारे में रिसर्च अब हारमोंस के स्तर पर चल रहा है।
इस सिलसिले में 15 जो़ड़ों में ऑक्सीटॉनिक और कोर्टीसोल हारमोन का स्तर चुंबन से पहले और बाद में जाँचा गया। जाँच में पाया गया कि चुंबन के बाद आक्सीटॉनिक जो कि व्यक्ति में एक-दूसरे के करीब आने की इच्छा उत्पन्न करता है उसका स्तर बढ़ा हुआ था और कोर्टीसोल जो कि तनाव पैदा करने वाला हारमोन है उसका स्तर गिर गया था।

सेब जूस से अल्जाइमर रहे दूर द जर्नल ऑफ अल्जाइमर डिजीज की रिपोर्ट के मुताबिक मेसाच्यूसेट्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में पाया है कि रोजाना एक ताजे सेब के जूस का सेवन अल्जाइमर की बीमारी को बॉय बॉय करता है। शोधकर्ताओं ने इस बात को प्रमाणित करने के लिए लैबोरेटरी में चूहों पर अध्ययन किया। अध्ययन में जिन चूहों को रोजाना सेब का जूस दिया गया उनके प्रदर्शन में कई गुणा की बढ़ोतरी हो गई।
शोधकर्ताओं के मुताबिक चूहों की तरह इंसान को भी अगर रोजाना 2 गिलास सेब का जूस लगातार एक महीने तक पिलाया जाए तो शरीर में बीटा एमोलाइड का स्तर कम हो जाएगा जो अल्जाइमर की बीमारी के दौरान दिमाग में पाया जाता है।

ज्यादा स्टेरॉयड खतरनाक
कोलंबिया यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर की मुख्य शोधकर्ता लियाल हरलिट्ज ने कहा कि स्टेरॉयड के उपयोग से शरीर को पहुँचने वाला नुकसान मोटापे से होने वाले नुकसान से कहीं बड़ा हो सकता है, जिससे बचने के लिए लोग स्टेरॉयड का उपयोग करते हैं।
झुर्रियों से बचाएगी कॉफी
झुर्रियों से छुटकारा पाने का नया फंडा है कॉफी पीने का! एक नामी कंपनी ने हाल ही में एक नए तरह की कॉफी लाँच की है जिसमें कॉलेजन मिला हुआ है। कॉलेजन शरीर में पाया जाने वाला एक प्रोटीन है जिसकी कमी होने पर त्वचा ढीली पड़ने लगती है और झुर्रियाँ उभरने लगती हैं। कंपनी ने यह नुस्खा पेश किया है कि कॉफी के रसिकों को इसमें कॉलेजन भी परोस दिया जाए यानी पाउच में कॉफी,दूध और 200 ग्राम कॉलेजन पैक कर दिया जाता है। आप बस इसे खोलिए और गरम पानी व शकर मिलाकर पी जाइए। कॉफी का मजा भी लीजिए और झुर्रियों को बाय-बाय भी कीजिए। फिलहाल यह कॉलेजनमय कॉफी केवल सिंगापुर में लाँच की गई है।



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