2009 : नए आविष्कार-नए चमत्कार

2009 में सेहत के लिए हुए अनूठे जतन

स्मृति आदित्य|
उबासी मानवता की निशानी
एक अध्ययन के मुताबिक उबासी मानवीय लोगों की पहचान है। यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में यही बात साबित की है। उनके मुताबिक उबासी हमारे भीतर की मानवता के प्रति प्रेम का संकेत है।

सब्जियों से निखरे त्वचा
एक अंतर्राष्ट्रीय टीम ने यह बात साबित की है कि प्रतिदिन के खान-पान में अगर पाँचवाँ हिस्सा भी फल और सब्जी का लिया जाए तो चेहरे पर गोल्डेन ग्लो या सोने की चमक आ जाती है। अध्ययन के मुताबिक चेहरे में चमक पैदा करने के लिए प्राकृतिक रास्ता ही सबसे बेहतर है। सेट एंड्रयूज यूनिवर्सिटी के प्रो. डेविड पेरेट ने बताया कि अध्ययन में कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की मदद से एक श्रेणी में 51 लोगों की त्वचा की टोन का विश्लेषण किया गया।

पूरा होगा सौ साल जीने का सपना

वैज्ञानिकों ने ऐसे जीन की खोज कर ली है जो आपको सौ साल जीने में मदद करेगा। इस जीन की खोज से उम्र को मात देने वाली दवा बनने का रास्ता साफ हो गया है। अलबर्ट आइंस्टीन कॉलेज ऑफ मेडिसीन के नेतृत्व में एक अंतर्राष्ट्रीय टीम ने इस जीन की खोज की है। उन्होंने अमेरिका के अशखेंजी ज्वीश समुदाय के लोगों पर यह अध्ययन किया। इन समुदाय के लोगों की औसत आयु 97 वर्ष होती है। इन लोगों में एक खास प्रकार का जीन होता है जो कोशिकाओं की आयु को कम करता है जिसके कारण कोशिकाएँ मनुष्य को वृद्ध नहीं होने देतीं। अध्ययन में 86 लोगों का विश्लेषण किया गया।
सेक्स-इच्छा जगाए डिप्रेशन की दवा
डिप्रेशन से परेशान महिलाओं में भले ही डिप्रेशन की दवा काम न करे लेकिन यह दवा महिलाओं में खोई हुई सेक्स इच्छा को भी जगा देती है। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि महिलाओं में एंटी डिप्रेशन की दवा वियाग्रा की तरह काम करती है। यह दवाई कम कामवासना वाली महिलाओं के लिए बेहद असरदार है।
शोध में पाया गया है कि फिलिबेनसरीन नाम की यह दवाई डिप्रेशन की बीमारी में महिलाओं को दी जाती है लेकिन यह सेक्स की भावनाओं को बढ़ाने में बेहद असरदार होती है। यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ केरोलिना के स्त्री रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर जॉन एम थॉर्प ने बताया कि यह ट्रायल एक थैरेपी पर आधारित है जो कम कामवासना की शिकार महिलाओं के दिमाग में सेक्स की चाह पैदा करती है।
भारतीय छाछ छरहरा बनाए
छाछ की उपयोगिता पर दादी-नानी के विचार पुराने लग सकते हैं। मगर अब वैज्ञानिकों ने सिद्ध किया है कि छाछ में औषधीय गुण होते हैं। जी हाँ, छाछ के सेवन से पेट में मौजूद कीड़े मर जाते हैं और शरीर का वजन अपने आप घटने लगता है। यह बात वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में साबित की है। वैज्ञानिकों ने दर्शाया है कि कीड़े इंसान की आँतों में मौजूद रहते हैं जो हमारे खाने पर निर्भर करते हैं।
अमेरिकी वैज्ञानिकों के शोध के मुताबिक जंक फूड खाने से यह कीड़े बहुत ज्यादा मात्रा में पनपते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह कीड़े पाचन प्रणाली में पाए जाते हैं जो मोटापे को बढ़ाने के लिए ईंधन प्रदान करते हैं। वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने पाया कि 'जंक फूड' के सेवन से ये कीड़े लगातार बढ़ते जाते हैं। जबकि छाछ के सेवन से ये मारे जाते हैं।
करोड़ों का हुआ स्टेम सेल का कारोबार
भले ही कुछ समय पहले स्टेम सेल की बैंकिंग देश में अस्तित्व में ही नहीं थी लेकिन आज यह कारोबार काफी फल-फूल रहा है और ज्यादा से ज्यादा लोग अपने शिशुओं की गर्भनाल के रक्त को जैव बीमा के तौर पर भंडारण करने के लिए आगे आ रहे हैं हालाँकि इसके लिए उन्हें मोटी रकम चुकानी पड़ती है। गर्भनाल के रक्त के भंडारण के मामलों में तेजी आ रही है क्योंकि तंत्रिका संबंधी बीमारियों में यह काफी कारगर है और अनेक बीमारियों के लिए इलाज की गारंटी देता है।
स्टेम सेल थैरेपी इलाज की एक ऐसी विधि है जिसमें नयी कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त कोशिकाओं के स्थान पर डाल दिया जाता है और बैंक इस रक्त के भंडारण के लिए 60,000 से लेकर 80,000 रुपए तक की राशि लेते हैं। स्टेम सेल थैरेपी के लाभों के बारे में जागरूकता बढ़ने के कारण छह साल से भी कम समय में अनेक ऐसी फर्म सामने आ गईं हैं जो इलाज और रक्त के भंडारण की सेवा मुहैया कराती हैं।
शोध को बढ़ावा देने वाले दिल्ली स्थित स्टेम सेल ग्लोबल फाउंडेशन के अनुसार, स्टेम सेल की बैंकिंग का कारोबार भारत में 100 करोड़ रुपए का हो चुका है और यह 35 प्रतिशत वार्षिक दर से बढ़ रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि वर्ष 2010 में यह कारोबार 140 करोड़ रुपए का हो जाएगा।

योगा से दिल सेहतमंद
रूस के अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि नियमित योग से श्वास संबंधी अभ्यास, चिंतन आदि से हृदय की सेहत में सुधार होता है। अनुसंधानकर्ताओं की मानें तो स्वस्थ हृदय का प्रतीक माने जाने वाले दिल की धड़कन योग करने वालों में अधिक तेज होती है जबकि योग न करने वालों में यह धीमी होती है।
नहीं रहेगी सूनी गोद
अब उन महिलाओं की गोद भी सूनी नहीं रहेगी जो गर्भाशय की खराबी के कारण माँ नहीं बन पाती हैं। चिकित्सा विज्ञान ने उनके लिए उम्मीद की किरण जगा दी है। ब्रिटिश वैज्ञानिक गर्भाशय प्रत्यारोपण के बहुत नजदीक पहुँच गए हैं। हालाँकि अभी इस प्रयोग की कामयाबी में 2 साल और लग सकते हैं। यदि किसी महिला को बीमारी या कैंसर की वजह से अपना गर्भाशय निकलवाना पड़ा है तो भी उसकी गोद भर सकती है। ब्रिटिश सर्जन और पशु चिकित्सकों की एक टीम ने अपने प्रयोगों को खरगोश पर अपनाकर देख लिया है। इसमें उन्हें 80 फीसदी सफलता मिली है। अब बहुत जल्द यह प्रयोग इंसानों पर किया जाएगा।
हड्डियों का पुनर्निर्माण
इजरायल के तेल अबीब विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित करने में सफलता हासिल की है जिसकी मदद से इंसान अपने चोटिल ऊतकों और खोई हुई हड्डियों को फिर से हासिल कर सकेंगे। यह भी ठीक उसी तरह होगा जैसे एक छिपकली अपनी कटी पूँछ को फिर से हासिल कर लेती है। तेल अबीब विवि के बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर जिल्बेरमैन ने पानी में घुलनशील और जैविक रूप से सक्रिय रेशों की मदद से यह तकनीक विकसित करने में सफलता प्राप्त की है।
फिलहाल उनका शोध जारी है, लेकिन उन्होंने दावा किया है कि भविष्य में वह ऐसी तकनीक विकसित कर लेंगी जिसकी मदद से दूसरी तरह के ऊतकों, मांसपेशियों, खून की नलिकाओं, और यहाँ तक कि चमड़ी को भी फिर से विकसित करने में सफलता हासिल की जा सकेगी।



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