2009 : नए आविष्कार-नए चमत्कार

2009 में सेहत के लिए हुए अनूठे जतन

स्मृति आदित्य|
यूँ तो साल 2009 स्वाइन फ्लू नामक भयावह बीमारी की चपेट में रहा लेकिन उसकी छाँव तले वो सारी उपलब्धियाँ भूला दी गईं जो बीते साल हमारे वैज्ञानिकों और चिकित्सकों के शोध के परिणामस्वरूप मिलीं। बीते वर्ष देश-विदेश के आविष्कारक गंभीर बीमारियों के सरल उपचार और बेहतर स्वास्थ्य के लिए नित नवीन तरीकों और निष्कर्षों की खोज में लगे रहे।


जवाँ बनाए विटामिन सी
विज्ञान पत्रिका 'सेल स्टेम सेल' के ऑनलाइन संस्करण में प्रकाशित एक अध्ययन कहता है कि विटामिन 'सी' उन कोशिकाओं को सहायता पहुँचाता है जिनसे हम वयस्क दिखते हैं। शोधकर्ता डयू एन किंग पेई ने कहा कि विटामिन 'सी' उन कोशिकाओं को शक्ति प्रदान करता है जो उम्र बढ़ने के साथ कमजोर हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में चूहों पर प्रयोग किया गया था जो सफल साबित हुआ। पेई ने कहा कि कोशिकाओं की 'रिप्रोसेसिंग' व्यवस्था के तहत यह अध्ययन किया गया है। उन्होंने कहा कि मानव पर भी यह प्रयोग सफल साबित होगा।
मानव होगा अमर
अमेरिकी वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि नैनो प्रौद्योगिकी और शरीर की कार्यप्रणाली की बेहतर समझ के माध्यम से आने वाले 20 वर्षों से भी कम समय में मानव को अमर बनाया जा सकता है। दशकों पहले से आने वाले समय की प्रौद्योगिकी की भविष्यवाणी करने के लिए प्रसिद्ध रहे वैज्ञानिक रे कुर्जवेल ने 'द सन' में लिखा है 'मैं और कई अन्य वैज्ञानिकों का अब मानना है कि करीब 20 वर्षों में हमारे पास ऐसे उपाय होंगे जिनसे शरीर अपने सॉफ्टवेयर्स को रिप्रोग्राम कर सकेगा। तब बुढ़ापे पर विराम लग सकेगा और जवानी फिर से लौटाई जा सकेगी।'
कुर्जवेल के मुताबिक 'जानवरों में रक्त कणिकाओं के आकार की पनडुब्बियों का परीक्षण किया जा चुका है। इन पनडुब्बियों को नैनोबोट्स नाम दिया गया है। इन नैनोबोट्स का प्रयोग बिना ऑपरेशन किए ट्यूमर और थक्के को दूर करने में किया जाएगा। जल्द ही नैनोबोट्स रक्त कणिकाओं का स्थान ले लेंगी। इसके अलावा रक्त कणिकाओं की तुलना में ये नैनोबोट्स हजार गुणा ज्यादा प्रभावकारी होंगी।'
स्वाइन फ्लू और इंडियन करी
भारतीयों को मसालेदार खानपान पसंद करने की एक और बड़ी वजह मिल गई है। रूसी डॉक्टरों का कहना है कि मसालेदार भारतीय करी स्वाइन फ्लू और आम सर्दी जुकाम सरीखी बीमारियों को रोकने में उतनी ही कारगर है, जितनी कि केमिस्ट की दवाएँ। करी में पड़ने वाले अन्य मसाले जैसे तेजपान, काली मिर्च, लहसुन, करी पत्ता इन सभी में विलक्षण औषधीय गुण निहित है। दही के साथ घुलकर करी के रूप में इनके गुणों में अधिक वृद्धि हो जाती है, फलस्वरूप ये स्वाइन फ्लू को दूर रखने में कारगर है।
डरावनी यादें डिलीट
वैज्ञानिकों ने दिमाग में मौजूद यादों को मिटाने के लिए कार्यप्रणाली निकाली है जिसकी मदद से बिना दवाई खाए दिमाग से बुरी और डरावनी यादों को दूर किया जा सकता है। साइंस जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार पिछले दस सालों में यह विज्ञान का सबसे बड़ा चमत्कार है जिसकी मदद से इंसान के दिमाग से डरावनी यादें मिट जाएँगी। यह शोध और भी कई बीमारियों और चिंता की बीमारियों को दूर करने में भी सहायक होगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि सिंपल बिहेवियर पर आधारित यह अक्रामक तकनीक डरावनी यादों से छुटकारा पाने के लिए कारगर साबित होगी।
खास चाय दर्द भगाए
अब सिर दर्द के लिए एस्प्रिन लेने की जरूरत नहीं। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी चाय विकसित की है जिससे सिर दर्द मिनटों में भाग सकता है। ब्रिटेन की न्यूकासल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक खास 'मिंट टी' पर शोध कर बताया है कि इससे सिर दर्द को दूर किया जा सकता है। इतना ही नहीं, इस चाय से कैंसर से बचाव और कोलेस्ट्रॉल को भी कम किया जा सकता है।
एंटीबायोटिक्स शैतान का पंजा
बीमारी के इलाज में एंटीबायोटिक्स की भूमिका लगातार जटिल होती जा रही है। जहाँ एक ओर नए एंटीबायोटिक्स की खोज हर दिन नई चुनौती पेश कर रही है, वहीं इसके ओद्यौगिक उत्पादन ने कई पेड़-पौधों की प्रजातियों के सामने विलुप्ति का संकट खड़ा कर दिया है। कालाहारी के रेगिस्तान में एक झाड़ी पाई जाती है जिसे सदियों से दक्षिण अफ्रीका महाद्वीप के आदिवासी 'शैतान के पंजे' के नाम से जानते हैं। इसी शैतान के पंजे से आज आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की सबसे कारगर जीवनरक्षक औषधि एंटिबायोटिक्स बनाई जाती है। अकेले जर्मनी में ही 46 विभिन्न दवा निर्माता जिनमें हैक्स्ट जैसी महारथी निर्माता भी हैं, शैतान के पंजे से निकलने वाले रसायनों से 57 तरह के विभिन्न उत्पाद बनाकर दुनिया भर में बेच रहे हैं। इनकी सम्मिलित सालाना आय 400 लाख डॉलर से अधिक है।
दाँतों के लिए रेड वाइन
इटली के वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पाया है कि रेड वाइन दाँत के लिए अच्छी होती है। इसमें मौजूद कैमिकल से दाँतों में हानिकारक बैक्टीरिया का घुसना नामुमकिन हो जाता है। दाँत का सबसे बड़ा दुश्मन स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटेंस बैक्टीरिया है जो चीनी खाने से दाँतों में घुसता है। जैसे ही यह दाँत के अंदरूनी भाग इनामेल में पहुँचता है दाँतों में होल बनने लगता है और धीरे-धीरे दाँत खराब हो जाता है। पेविया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया है कि रेड वाइन की थो़ड़ी मात्रा भी इस बैक्टीरिया को नष्ट कर देती है।
शोधकर्ताओं ने अपने शोध के दौरान देखा कि जहाँ-जहाँ दाँत में रेड वाइन घुसी थी वहाँ-वहाँ से बैक्टीरिया मर गए। इसके अलावा उन्होंने सिर्फ अल्कोहल को दाँतों में डाला लेकिन उससे बैक्टीरिया नहीं मरा। इसका मतलब यह हुआ कि बैक्टीरिया सिर्फ अल्कोहल से नहीं मरता बल्कि रेड वाइन में मौजूद अन्य तत्व इसे मारने के लिए जिम्मेदार होते हैं।
सफेद बाल : कौन जिम्मेदार
आपके बाल लगातार सफेद होते जा रहे हैं जिसके लिए आप यह सोचते हैं कि यह तनाव की वजह से सफेद होते जा रहे हैं तो आपकी यह राय बिल्कुल गलत है, क्योंकि सफेद बालों के लिए तनाव नहीं आपके माता-पिता जिम्मेदार हैं। यह बात एक नए अध्ययन में सामने आई है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि महिलाओं के सफेद बाल होने के पीछे उनका पारिवारिक इतिहास मायने रखता है। इस बात को प्रमाणित करने के लिए शोधकर्ता बॉफिंस ने डेनमार्क की जुड़वा बहनों का अध्ययन किया
सरवाइकल कैंसर की पहचान
ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने एक ऐसे डिवाइस को तैयार किया है जिससे सरवाइकल कैंसर की पहचान बीमारी से कई हफ्ते पहले ही कर ली जाएगी। इस डिवाइस से लाखों महिलाओं को लाभ होगा। एपीएक्स नाम का यह डिवाइस टीवी के रिमोट कंट्रोल के आकार का है। यह एक ऐसा डिवाइस है जिसके इस्तेमाल से किसी भी तरीके का दर्द महसूस नहीं होता। यह डिवाइस छुटे हुए ट्यूमर सेल को पहले से ही पहचान लेता है। जैसे ही इस ट्यूमर सेल पर टार्च का प्रकाश पड़ता है तो ट्यूमर प्रकाश को अवशोषित कर लेता है जिससे यह स्वस्थ उत्तक से अलग तरह का दिखने लगता है।
त्वचा के लिए सहायक जीवाणु
एक नए अध्ययन के मुताबिक त्वचा की सतह पर रहनेवाले जीवाणु स्वस्थ त्वचा के लिए मददगार होते हैं। बाल चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर एवं कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रमुख रिचर्ड एल गालो के शोध में यह कहा गया है कि ये जीवाणु वास्तव में हमारी त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मददगार होते हैं। इसके लिए चूहों पर अध्ययन किया गया। चूहे पर सफल परीक्षण के बाद इस अध्ययन को मानव पर भी किया गया। मानव त्वचा पर किए गए प्रयोग के बाद यह पाया कि ये जीवाणु वास्तव में हमारी स्वस्थ त्वचा के लिए मददगार हैं। अध्ययन के अनुसार त्वचा पर बाहर जमें जीवाणु आणविक आधार पर शरीर की स्वच्छता बनाए रखने में मददगार होते हैं।
सूर्य किरण और दमकती त्वचा
आम धारणा है कि सूरज की रोशनी से त्वचा की रंगत पर बुरा असर पड़ता है लेकिन ऑस्ट्रेलिया स्थित मेनजीज संस्थान के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि सूरज की रोशनी में लगातार रहने से शरीर में विटामिन डी का विकास होता है और स्किन में निखार आता है। विटामिन डी का इस प्रक्रिया से विकसित होने से अलग-अलग स्कलेरॉसिस (एमएस) से बचने में मदद मिलती है।
स्लिम बनना है तो 'नो स्मोकिंग'
नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के फिन्बर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने पाया कि वजन घटाने की कोशिश में लगी जिन महिलाओं ने सिगरेट को अलविदा कहा, वे बेहतर ढंग से अपनी चर्बी को भी कम करने में सफल हुईं।

महिलाएँ सुंदर क्यों पुरुषों को यह बात हमेशा खलती है कि महिलाएँ उनकी तुलना में ज्यादा सुंदर क्यों दिखती है। अब उनके इस सवाल का जवाब एक अध्ययन ने ढूँढ निकाला है, जिसके मुताबिक महिलाएँ सुंदर दिखने के लिए रोजाना विभिन्न सौंदर्य प्रसाधनों के रूप में 500 से अधिक रसायन अपने चेहरे और बदन पर लगाती हैं।डियोड्रेंट बनाने वाली कंपनी बियोनसेन द्वारा कराए गए अध्ययन में बताया गया है कि सुंदरता की ललक रखने वाली महिलाएँ सौंदर्य प्रसाधन के तौर पर 13 उत्पादों तक का इस्तेमाल करती हैं।
‘द सन’ ने बियोनसेन के शेरलोट स्मिथ के हवाले से बताया, सुंदरता के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तौर-तरीकों में नाटकीय बदलाव आया है। पहले कहीं जाने से पहले अपने चेहरे को धोना ही काफी होता था, लेकिन आजकल इसकी जगह रोजाना चेहरे और बदन को नकली रंग दिया जाता है, नियमित तौर पर नाखून प्रसाधन किया जाता है और बालों को अलग-अलग रूप दिया जाता है।' अध्ययन में बताया गया है कि सर्वाधिक इस्तेमाल किए जाने वाले सौंदर्य प्रसाधन लिपस्टिक में औसतन 33 रसायन होते हैं, बॉडी लोशन में 32, मस्कारा में 29 और हैंड मॉइश्चराइजर में 11 रसायन होते हैं।



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