वर्ष 2009 : आर्थिक मंदी और भारत

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वर्ष 2008 ही नहीं, पूरे विश्व के लिए मानो तुषारापात करने वाला सिद्ध हुआ। बुरी तरह औंधे मुँह गिरा। आर्थिक मंदी ने सारे विश्व को अपनी चपेट में ले लिया। अब मंदी से जूझते लोगों की नजर टिकी हुई है पर कि शायद नया वर्ष बदले हालातों का साक्षी बन जाए।

1 जनवरी 2009 की ग्रह स्थिति का अध्ययन करें तो गुरु व राहु मकर राशि में चांडाल योग बनाए बैठे हैं। शनि शत्रु राशि सिंह में है। सूर्य-मंगल धनु में हैं। बुध मकर और शुक्र कुंभ में रहेंगे। अर्थात धन कारक प्रमुख ग्रह निर्बल हो गए हैं। अत: जनवरी-फरवरी माह में किसी विशेष परिवर्तन की उम्मीद नहीं है।

इसी स्थिति को भारत की कुंडली के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो कुंडली के नवम भाव में चांडाल योग है। शनि चतुर्थ में है। शनि मूल स्थान से गोचर में चौथे और राहु नौवें में है। यह स्थिति आर्थिक मंदी की द्योतक रहेगी।

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मई में गुरु कुंभ राशि में गमन करेंगे। यह भारत की कुंडली में दशम भाव है व गुरु मूल कुंडली से पाँचवें होकर शुभ हो जाएँगे। शनि भी 9 सितंबर से कन्या राशि में जाएँगे व मूल स्थिति से तीसरे होकर आय भाव को देखेंगे। भारत के लिए शनि योग कारक है, भाग्य को उन्नति व स्थि‍रत देंगे।

इस ग्रह स्थिति से निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि वर्ष 2009 का तिहाई भाग अर्थात पहले तीन-चार महीने सामान्य ही रहेंगे। मई से स्थिति सुधरेगी। आर्थिक उन्नति होगी। मंदी के बादलों का छँटना शुरू होगा। सितंबर के बाद उन्नति के आसार बढ़ते जाएँगे।

भारती पंडित|
भारत के लिए शनि चूँकि राज्य पक्ष का कारक है, इस वर्ष महती भूमिका निभाएगा। अत: सत्तापक्ष को भ्रष्टाचार, कालाबाजारी, नशाखोरी पर लगाम कसकर रखनी होगी। शनि न्याय के देवता हैं और अन्याय बर्दाश्त नहीं करते। यदि जनता परेशान रही, भ्रष्ट राजनेता व जमाखोर मजे करते रहे, समाज का नैतिक और चारित्रिक पतन होता रहा तो शनिदेव उग्र रूप लेकर नुकसान भी कर सकते हैं।



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